न्यूक्लियर क्लब का हो-हल्ला

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जिसे हम विशष्टि नाभिकीय क्लब कहते हैं, व्यवहार में उसकी विशष्टिता धीरे-धीरे ध्वस्त होती रही है एवं यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा एवं उसके तीन दिन बाद नागासाकी पर एटमी हमले के साथ अमेरिका एकाएक वैश्विक महाशक्ति का रूतबा पा गयाइस भयावह कदम से युद्ध का पूरा नजारा बदल गयाएक बम पूरे शहर को बरबाद करने के लिए काफी थानिश्चय ही युद्ध के उस डरावने माहौल में अनेक देशों के भीतर एटमी ताकत बनने की आकांक्षाएं कुलबुलाई होंगीउस समय इस महाविनाशकारी तकनीक पर अमेरिका का एकल अधिकार थायानी तब एटमी क्लब का वह अकेला सदस्य थाकम्युनिस्ट विचारधारा को दुनिया भर में स्थापित करने के अभियान में लगे सोवियत संघ ने 1949 में धमाका करके अमेरिकी एकल वर्चस्व को चकनाचूर किया एवं वह भी दूसरी महाशक्ति की पदवी पर विराजमान हो गयादो विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा की यह शुरूआत थी एवं सोवियत मानसिकता यह थी कि यदि उसने दुनिया को भयभीत करने वाली इस ताकत का प्रदर्शन नहीं किया तो फिर उसके साथ कोई देश नहीं आना चाहेगा एवं अमेरिका का वर्चस्व स्थापित हो जाएगाइस प्रकार एटमी क्लब दो सदस्यीय हुईसोवियत संघ भले दुनिया में आम आदमी के अधिकारों की रक्षा के नाम पर कम्युनिस्ट व्यवस्था को निर्यात करने का अभियान चल रहा था एवं अमेरिका लोकतंत्र के नाम पर उसका विरोध, किंतु दोनों की मनासिकता यही थी कि यदि किसी तीसरे ने इस क्लब में प्रवेश पा लिया तो उनकी महाशक्ति की वर्चस्ववादी छवि लुंठित हो सकती हैचूंकि ब्रिटेन अमेरिका का सर्वाधिक विश्वसनीय देश बन चुका था इसलिए 1952 में उसके धमाके में सहयोग कर उसने उसे भी क्लब में शामिल कर लियालेकिन उसके बाद से दोनों महाशक्तियों की कोशिश ऐसी सख्त व्यवस्था कायम करने की रही ताकि कोई भी अन्य देश इस महाविनाशकारी ताकत को हासिल करने की हिमाकत करेवैसे अमेरिका एवं सोवियत संघ को आरंभ में शायद यह कल्पना नहीं थी कि दुनिया को भयाक्रांत करने वाले विनाशकारी अस्त्रोें की उसकी क्षमता को चुनौती मिल सकेगीकिंतु, जब शक्ति संतुलन, प्रभाव विस्तार एवं दुनिया में शक्तिशाली होने की यह कसौटी हो गई हो तो सबकी ललचाई आंखें इस आ॓र लग गईंफ्रांस ने 13 फरवरी, 1960 को विस्फोट कर अपने लिए उस विशष्टि क्लब का दरवाजा खोल लियाफ्रांस ने उस समय धमाका किया जब अमेरिका एवं सोवियत संघ ने फ्रांस एवं चीन के इरादों का संकेत मिलने के बाद 1958 से परीक्षणों पर एकतरफा रोक लगाकर जिनेवा में परीक्षणों पर रोक के लिए संधि की तैयारी आंरभ कर दी थीयह सीधे-सीधे अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन एवं रियलपोलिटिक अवधारणा को चुनौती थीलेकिन फ्रांस ने इसे अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए अपरिहार्य घोषित किया एवं अंतत: पांच वर्षों बाद वह एटमी क्लब में प्रवेश कर गयाइसके बाद चीन ने 31 अक्टूबर 1964 को धमाका कर यह घोषणा की कि वह नाभिकीय शक्ति है तो शेष चारों शक्तियों को यह सूझ ही नहीं रहा था कि क्या करेंवास्तव में चीन के इस कदम के बाद ही इस महाविनाशक ताकत को नाभिकीय अप्रसार संधि के दायरे में कैद करके शेष देशों के प्रवेश का रास्ता बिल्कुल बंद करने की व्यवस्था की गईइसके अनुसार केवल ये पांच देश नाभिकीय संपन्न हैं एवं शेष 185 गैर नाभिकीय देशइसके बाद सिद्धांत रूप में इस विशेषाधिकार संपन्न क्लब की सदस्यता केवल स्थायी रूप से बंद हो गई, बल्कि इसमें प्रवेश करने की कोशिश करने वालों के लिए सजा भी निर्धारित हुईसामंतवादी सोच वाली यह संधि पांचों देशों के नाभिकीय अस्त्रों पर विशेषाधिकार को मान्यता देती है एवं अन्यों को ऐसा करने से वंचित करती हैइसी के सहयोगी के तौर पर परीक्षणों पर पूर्ण प्रतिबंध संबंधी संधि जिसे सीटीबीटी भी कहते हैं, का विकास हुआये दोनों संधियां नाभिकीय क्लब के चारों आ॓र ऐसी सख्त एवं डरावनी बनकर खड़ी हैं जिसके भीतर प्रवेश करने की हिमाकत तक करने वालों की शामत जाती हैकिंतु कुछ महत्वांकाक्षी देशों ने इसके बावजूद प्रयास जारी रखा। 1970 के दशक में कई देशों ने एक साथ नाभिकीय शक्ति बनकर इस विशष्टि क्लब में प्रवेश की कोशिश की थीमसलन, दक्षिण कोरिया, जिसे अमेरिका ने इस धमकी के साथ पीछे हटने को मजबूर कर दिया ि ऐसा करने पर वह प्रायद्वीप से अलग हो जाएगाइजरायल ने 1981 में एक हवाई हमला कर इराक की कोशिशों को विराम दे दियालेकिन दक्षिण अफ्रीका एवं अर्जेंटिना ने यह सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने नाभिकीय हथियार बना लिए थे जिसे बाद में नष्ट कर दियाइजरायल के बारे में तो माना जाता है कि उसके पास नाभिकीय ताकत हैउसके पास नहीं भी हो तो भी वह अमेरिकी नाभिकीय छतरी तले हैलीबिया एवं ईरान उन देशों में हैं जो लंबे समय से नाभिकीय ताकत बनने की जुगत लगा रहे हैंउत्तर कोरिया 1980 के दशक से ही नाभिकीय ताकत विकसित करने में लगा थाउसके साथ 1984 से ही बातचीत चली एवं 1994 में बातचीत के ढांचे पर सहमति भी हुईलेकिन उसे मनाना संभव नहीं हुआउसने पिछले वर्षो में धमाका करके स्वयं को नाभिकीय ताकत घोषित कर दियाइसके पहले उसने अप्रसार संधि एवं सीटीबीटी से अपने को अलग करने की घोषणा कर दीइसका प्रभाव चारों आ॓र दिख रहा हैवास्तव में यह स्वीकार करना चाहिए कि अप्रसार संधि या अन्य भेदभाव कार व्यवस्थाएं दृढ़ निश्चयी देशों को नाभिकीय ताकत हासिल करने से रोकने में अक्षम हैकम से कम इसका कोई नैतिक प्रभाव तो विश्व मानस पर नहीं ही हैक्लब के विशष्टि सदस्य किस प्रकार का पाखण्ड एवं दोहरा आचरण बरतते हैं उसका एक उदाहरण चीन हैचीन ने धमाके के साथ तीसरी दुनिया के देशों के ऐसे हितैषी नेता की छवि बनाने की कोशिश की थी, जो केवल भेदभावमूलक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का सक्रिय विरोध करता है, बल्कि उन छोटे एवं पिछड़े देशों के हितों की सुरक्षा के लिए भी खड़ा है जिनके पास तकनीकी सामर्थ्य एवं राजनीतिक कौशल का अभाव हैदूसरे शब्दों में उसका संदेश यह था कि उसने तीसरी दुनिया के प्रतिनिधि के नाते विस्फोट कर शक्तिसंपन्न देशों को चुनौती दी हैकिंतु इसने भी उसी भेदभावकारी सामंती व्यवस्था को स्वीकार कर 1992 में अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किया तथा 1995 में इस संधि की आयु सीमा को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने के निर्णय का समर्थन कर स्वयं को तीसरी दुनिया में एकमात्र नाभिकीय शक्ति बने रहने की पुख्ता व्यवस्था कीभारत ने पहले 1974 एवं फिर 1998 में पोखरण परीक्षण द्वारा चीन की इस विशष्टि स्थिति को तो ध्वस्त किया ही, पांच सदस्यीय विशष्टि क्लब की दीवार के समानांतर एक अस्पृश्य सदृश छोटा ही सही एकल बसेरा स्थापित कियाविस्फोट के साथ नाभिकीय अस्त्र क्षमता का सबूत देने के बावजूद पाकिस्तान की स्थिति संभ्रम वाली रहीवह यह तय ही हीं कर पाया कि पुरानी अवधारणा के अनुसार वह इसे इस्लामी बम करार दे या कुछ औरवह अभी तक इस ऊहापोह की मन:स्थिति से गुजर रहा हैबावजूद इसके इन दोनों देशों की भूमिका ने क्लब के दरवाजे पर तो दस्तखत दे ही दीपोखरण द्वितीय के बाद सबसे आक्रामक देश चीन ही था जिसने विभिन्न तर्कों से यह साबित करने की कोशिश की कि अमेरिका एवं रूस वैधानिक रूप से भारत की नाभिकीय क्षमता को वापस शून्य तक लाने के लिए कार्रवाई करने को बाध्य हैंयह बात दीगर है कि अमेरिका एवं रूस ने इसके विपरीत धीरे-धीरे भारत के साथ सहयोग की नीति अपनाई हैनिश्चित तौर पर चीन को यह अंतर्मन से स्वीकार हीं हैएशिया एवं अफ्रीकी देशों का नेता बनने का उसका सपना इससे टूट रहा हैलेकिन चीन अतीत के प्रसंगों एवं नाभिकीय शक्ति के संदर्भ में दुनिया के बदलते मनोविज्ञान को शायद नजरअंदाज कर रहा हैयदि दक्षिण कोरिया को अमेरिका रोक सका तो इस कारण कि दक्षिण कोरिया ही नहीं, जापान एवं दक्षिण पूर्व एशिया के अन्य देशों को अमेरिकी रवानगी की संभावना ने भयभीत कर दिया थाशीतयुद्व काल में दोनों खेमों के देश अपनी महाशक्ति से रक्षा के लिए आगे आने की उम्मीद करते थे. कोरिया को तो अमेरिका ने वायदा किया था कि किसी विपरीत स्थिति में वह . कोरियापर हमला कर देगाहालांकि उसने चीन के संबंध में ऐसा नहीं कहा हैइसलिए जापान में नाभिकीय हथियार बनाने की मांग उठ रही हैईरान के अड़ियल रवैये के कारण पश्चिम एशिया के सऊदी अरब, मिस्र जैसे देशों की बेचैनी बढ़ रही हैवास्तव में नाभिकीय क्लब की विशष्टिता के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं इतनी एकपक्षीय हैं कि इसके विरूद्ध विद्रोह उबलना स्वाभाविक हैहालांकि अप्रसार संधि का अंतिम लक्ष्य नाभिकीय अस्त्रों का सम्पूर्ण नाश है, किंतु पांचों में से कोई देश इसकी पहल को तैयार नहीं हैसीटीबीटी को इस लक्ष्य की पूर्ति की सीढ़ी बताया गया, लेकिन अमेरिका ही इस संधि का अनुमोदन नहीं कर पाया हैयह बात अलग है कि उसने अपनी आ॓र परीक्षणों पर एकतरफा रोक लगा रखी हैकुछ देशों को नाभिकीय आपूर्ति समूह में शामिल कर विशष्टिता का दर्जा दिया गयाइससे उनके अहं की तुष्टि होती हैलेकिन जो देश इन सबसे बाहर हैं उनके लिए आखिर रास्ता क्या है? पाकिस्तान के अब्दुल कादिर खान जैसे नाभिकीय वैज्ञानिक उनके लिए उम्मीद की किरण हैं, जो चोरी से तकनीक एवं उपाय दोनों प्रदान करने के लिए आगे आते हैंलीबिया के राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफी के पुत्र ने कहा कि उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि नाभिकीय बम बनाने का तरीका कितनी आसानी से हासिल किया जा सकता हैवास्तव में पूरी स्थिति डरावनी है एवं नाभिकीय क्लब के बने रहने से भ्यता के विनाश एवं भूमंडल के श्मशान कब्रगाह में तब्दील होने का खतरा बना हुआ है

Published in:  on November 22, 2007 at 6:30 am Leave a Comment