अपराध की राजधानी भी है दिल्ली

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सत्ता का केंद्र और सुरक्षा के बेहद मजबूत तंत्र को सोच कर यदि कोई दिल्ली को सुरक्षित माने तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। गृह मंत्रालय के सीधे नियंत्रण में होने के बावजूद दिल्ली में अपराध व अपराधियों के पौ-बारह है। यह तथ्य किसी सर्वे या किसी के बयान पर नहीं, बल्कि खुद गृह मंत्रालय के आंकड़ों से निकला है। अंडर व‌र्ल्ड के लिए दुनिया भर में बदनाम मुबंई दिल्ली से पीछे दूसरे नंबर पर है। इतना ही नहीं दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के तहत आने वाले 14 प्रमुख शहरों में भी अपराधों में सिरमौर है। चाहे जरूरत रोजी-रोटी की हो या फिर आगे बढ़कर कुछ कर दिखाने की। देश के दूरदराज के लोग महानगरों की तरफ खिंचे चले आते हैं। लेकिन इन महानगरों के हालात वैसे नहीं होते जैसे लोग सोचते हैं। देश के चार प्रमुख महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व चेन्नई में एक तरह से पूरा भारत बसता है। देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली में यह संख्या ज्यादा है, लेकिन कानून-व्यवस्था के मामले में दिल्ली बाकी तीनों महानगरों से बदतर हैं। गृह राज्यमंत्री माणिकराव गावित ने संसद में एक लिखित सवाल के जवाब में जो आंकड़े रखे उनसे लगता कि दिल्ली अपहरणकर्ताओं के लिए सबसे मुफीद महानगर है। यहां पर वर्ष 2004 में 1066 व वर्ष 2005 में 1302 अपहरण के मामले दर्ज किए गए। इसी अवधि में अन्य महानगरों में मुंबई में 178 व 198, कोलकाता में 119 व 82 और चेन्नई में 37 व 55 अपहरण के मामले सामने आए। आगजनी के मामलों में भी दिल्ली सबसे आगे हैं। यहां पर वर्ष 2004 में आगजनी के 36 मामले दर्ज किए गए, जबकि मुंबई में 10 मामले सामने आए। वर्ष 2005 आगजनी के दिल्ली में 42, मुंबई में 10 मामले दर्ज किए गए। इन दोनों ही सालों में चेन्नई व कोलकाता में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। केवल डकैती के मामलों में दिल्ली, मुंबई से कुछ पिछड़ी है। वर्ष 2004 में दिल्ली में 27, मुंबई में 42, चेन्नई में चार व कोलकाता में 19 डकैती के मामले सामने आए, जबकि वर्ष 2005 में दिल्ली में 23, मुंबई में 43, चेन्नई में पांच व कोलकाता में 12 मामले दर्ज किए गए। महानगरों की बात छोड़ यदि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के तहत आने वाले दिल्ली व उसके आसपास के अन्य 13 प्रमुख शहरों की बात की जाए तो यहां भी दिल्ली सभी का सरदार बना हुआ है। 2005 में एनसीआर में अपहरण के 2336 मामले दर्ज हुए इनमें दिल्ली में 1590, गौतमबुद्ध नगर में 51, फरीदाबाद में 91, गाजियाबाद में 103, गुड़गांव में 38, अलवर में 86, बागपत में 33, बुलंदशहर में 81, झज्झर में 14, मेरठ में 139, पानीपत में 35, रेवाड़ी में 20, रोहतक में 16 व सोनीपत में 39 मामले दर्ज किए गए। डकैती के 102 मामलों में भी दिल्ली 27 मामलों के साथ सबसे आगे है। इसके अलावा आगजनी के 137 मामलों में अकेले दिल्ली में 47 मामले दर्ज हुए हैं।

Published in: on November 26, 2007 at 11:17 am Comments (1)