कानून 17, फिर भी बेहाल हैं असंगठित मजदूर

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अगर केंद्र सरकार और इसकी एजेंसियों ने अपने कानूनों को सही तरीके से लागू किया होता तो देश के असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति आज इतनी खराब नहीं होती। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की सामाजिक, आर्थिक व व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए अभी तक 17 कानून बनाए जा चुके हैं लेकिन इनमें से किसी भी कानून को सही तरीके से लागू नहीं किया जा सका है। इस बात का खुलासा असंगठित क्षेत्र में उद्यमशिलता पर गठित राष्ट्रीय आयोग (एनसीईयूएस) ने अपनी रिपोर्ट में की है। हालांकि आयोग ने पुराने कानूनों को सही तरीके से लागू करने के बजाय इन मजदूरों की स्थिति बेहतर बनाने के लिए अलग से एक और व्यापक कानून बनाने का सुझाव दे दिया है। आयोग ने असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लगभग 40 करोड़ मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए दर्जनों सुझाव दिए हैं। इसमें इन मजदूरों को पर्याप्त वेतन देने, इनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, इनके काम करने के स्थल व वातावरण को सुधारने की बात कही गई है। लेकिन जब आप असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से संबंधित मौजूदा कानूनों को देखें तो साफ हो जाता है कि इन सब की व्यवस्था पहले से ही है। यह अलग बात है कि इन कानूनों के बारे में न तो मजदूरों को मालूम है और न ही सरकार इन्हें गंभीरतापूर्वक लागू कर पाई है। उदाहरण के तौर पर एनसीईयूसी ने असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिला मजदूरों को पुरुषों के समान मजदूरी दिलाने के लिए कई सुझाव दिए हैं जबकि हकीकत यह है कि समान पारिश्रमिक कानून, 1978 के तहत इस बारे में पहले से ही प्रावधान हैं। इसमें साफ-साफ कहा गया है कि कोई भी नियोक्ता लिंग के आधार पर अपने मजदूरों के बीच मजदूरी देने में भेद-भाव नहीं कर सकता। इसी तरह से आयोग की रिपोर्ट से साफ होता है कि देश के कई हिस्सों में बंधुआ मजदूरी अभी भी बेधड़क जारी है। आयोग ने इसे समाप्त करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। जाहिर है कि वर्ष 1976 में बंधुआ मजदूरी को खत्म करने के लिए बनाए गए कानून को गंभीरता से लागू नहीं किया गया है। इसी तरह से असंगठित क्षेत्र में कार्यरत बाल मजदूरों की सुरक्षा के लिए बाल मजदूर (नियमन व रोक) अधिनियम, 1986 की मदद ली जा सकती है। खतरनाक क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों के लिए भी पहले से कानून मौजूद है। आयोग ने पाया है कि खतरनाक माने जाने वाले क्षेत्रों में ज्यादा मजदूर असंगठित क्षेत्र के हैं इसलिए इनकी सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय करने की आवश्यकता है। इसी तरह से विस्थापित असंगठित मजदूरों के लिए भी कानून है। यातायात क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा मोटर ट्रांसपोर्ट वकर‌र्््स एक्ट, 1961 भी है। दवा उद्योग में कार्यरत श्रमिकों के लिए बिक्री संव‌र्द्धन कर्मचारी (सेवा शर्त) अधिनियम, 1976 है। मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1976, बीड़ी व सिगार वर्कर्स एक्ट, 1966 और कांट्रेक्ट लेबर एक्ट, 1970 जैसे दर्जन भर और कानून हैं जो असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की स्थिति सुधारने में कारगर साबित हो सकते हैं।

Published in:  on December 6, 2007 at 9:56 am Leave a Comment