पैसा और ग्लैमर के पेज थ्री

party.jpg

एक समय पाठकों के बीच बहुत कम लोकप्रियता वाली ब्रिटिश पत्रिका ‘द सन’ के संपादक लैरी लैम्ब ने जब युवती स्टीफनी रान की टॉपलेस तस्वीर पेज तीन पर छापने का निर्णय लिया होगा तो उनकी मंशा अपने बॉस रूपर्ट मर्डोक को मुश्किल में डालना नहीं बल्कि पत्रिका को लोकप्रियता दिलाना और उसका प्रसार बढ़ाना था। दरअसल यह शुरूआत थी उस दुनिया की, जिसे आज सेलिब्रिटीज की दुनिया कहते हैं और इस दुनिया के भीतर झांकने की ललक आम लोगों में बढ़ती जा रही है।
समाज में खास और महान लोगों के समानांतर यह नई कतार उन लोगों की है, जिन्हें सेलिब्रिटीज कहते हैं और यही उन्हें कहलाना भी पसंद है। दिलचस्प है कि भारत जैसे देश में, जहां बाजार की धमक बाकी दुनिया के मुकाबले थोड़ी बाद में महसूस की गई वहां आज इस समानांतर कतार में एक तरफ राखी सावंत खड़ी हैं तो दूसरे छोर पर डॉ नरेश त्रेहन जैसे नामी सर्जन। ये वो लोग हैं जिन्हें लत लग चुकी है चर्चा में रहने की और जिन्हें भय लगता है अपने जैसों की दुनिया से बाहर निकलने में। यही कारण है कि उन्होंने अपनी रोजमर्रा की जिदगी के बीच से कई ऐसे मौके निकालने सीख लिए हैं जब वे साथ मिल बैठ सकें, गपशप कर सकें और अपनी खुशी और तसल्ली के लिए पीने-पिलाने तक की हसरत पूरी कर सकें। यह कहना भी पूरी तरह सही नहीं है कि मिल-जुलकर ऐसे मौके, जिन्हें पेज थ्री पार्टी के तौर पर ज्यादा जानते हैं, वहां सिर्फ ग्लैमर और चकाचौंध की दुनिया से सरोकार रखने वाले लोग ही पहुंचते हैं। मुजफ्फर अली, प्रसून जोशी, प्रह्लाद कक्कड़, शोभा डे, जावेद अख्तर जैसे ‘क्रिएटिव’ कहे जाने वाले लोग भी आज बेतकल्लुफी से इन पार्टियों में अपने मन की कहते और करते देखे जाते हैं। दरअसल महानगरों में मेल-जोल के मौके बिल्कुल खत्म हो गए हैं और यही कारण है कि अलग हटकर करने वाले लोग इन पार्टियों में आते-जाते हैं।
इन पार्टियों में अपनी लक-दक दिखाने के लिए भी कई लोग जाते हैं या वैसे लोग, जिनकी आदत में यह शामिल हो गया है। पेज थ्री पर छपी इन पार्टियों की झलक देख लोगों के मन में लालसा जगती होगी कि आखिर इन पार्टियों में होता क्या है। टीवी एंकर एवं शो होस्ट गीतिका गंजू कहती हैं, ‘पार्टी र्सिकल के पुराने लोग मानसिक रूप से संभले हुए हैं जबकि नये लोगों का व्यवहार मूर्खतापूर्ण है। इनमें गहराई नहीं है, ये ज्यादा पीते हैं। कम उम्र के लोग हैं, खुद को बड़ा समझते हैं। इनमें गर्मजोशी नहीं होती। ये संवेदनशील भी नहीं होते।’ गीतिका के कथन से पैसे वालों की जबरदस्ती रखी गई पार्टियों की मानसिकता का खुलासा होता है। ये पार्टियां भी अलग-अलग किस्म की होती हैं। कुछ में केवल फैशन र्सिकल के लोग ही जाम उठाते नजर आते हैं। दिल्ली में होने वाली पार्टियों में मिस इंडिया रह चुकीं मॉडल नेहा कपूर, फैशन डिजाइनर रोहित बल, शिवानी वजीर पसरिच, मेकअप आर्टिस्ट अंबिका पिल्लई कुछ ऐसे नाम हैं जो आए दिन अखबार के पेजों पर दिख जाते हैं। फैशन प्रीव्यू के नाम पर भी ऐसी पार्टियों का आयोजन जमकर किया जाता है। एक ऐसी ही पार्टी में नेहा कपूर मीडिया का ध्यान अपनी आ॓र आर्किषत करने के लिए टेबल पर चढ़ गईं और लगी बोलने- मैं उड़ रही हूं, मैं मजे कर रही हूं।’ जाहिर है, लोगों का ध्यान उनकी आ॓र गया। इस तरह की चोंचलेबाजी इन पार्टियों में खूब होती है।
अखबार के पेजों पर दूसरी तरह की खास पेज थ्री पार्टियों की भी रपट छपती है, जिनमें शामिल होता है वह वर्ग जिससे हम प्रभावित रहते हैं। इस तरह की पार्टियां पुस्तक विमोचन, संगीत पुरस्कार आदि के उपलक्ष्य में आयोजित की जाती हैं। सुषमा सेठ, अमजद अली खां और शोभा डे सरीखे लोग इसका हिस्सा बनते हैं। दिल्ली में काफी समय से रह रहे जाने-माने साहित्यकार विष्णु प्रभाकर कहते हैं कि पहले हमारा जमावड़ा कॉफी हाउस में लगता था पर अब उसकी जगह ले रही है यह पार्टी संस्कृति। अब कमी भी हो गई है कॉफी हाउस की, अधिकतर तो बंद ही हो गए हैं। ऐसे में ये र्पािटयां ही नए समय के क्रिएटिव लोगों के मेल-जोल की जगह ले रही हैं। अब तो कई छोटे शहरों- जैसे पटना में कॉफी हाउस बंद हो गए हैं जहां रेणु का आना-जाना लगातार होता था।’
इन सबके अलावा पेज थ्री पार्टियों की चुहल का हिस्सा होता है एक ऐसा वर्ग, जो न तो ग्लैमर की दुनिया का हिस्सा है और न ही क्रिएटिव वर्ग का। हां, यह जरूर है कि यह वर्ग धीरे-धीरे इस आ॓र बढ़ जरूर रहा है। दिल्ली-मुंबई के व्यवसायियों की एक कतार इन पेज थ्री पार्टियों में नजर आने लगी है, बल्कि यह कहना ज्यादा उचित होगा कि ये खुद ही ऐसी पार्टियां आयोजित करते हैं। पेज थ्री पर छपने की इनकी ललक इस कदर बढ़ी है कि ये लोग सी-डी ग्रेड के बॉलीवुडिया सितारों को बतौर रकम पेश करके अपनी पार्टी में आमंत्रित करने लगे हैं ताकि इनकी तस्वीर किसी तरह अखबार के में छप सके। पायल रोहतगी, प्रीति झंगियानी, अमृता अरोड़ा, मेघना नायडू जैसी अभिनेत्रियों के अलावा आइटम नंबर करने वाली लड़कियों को भी यहां आमंत्रित किया जाता है। मीडिया ने भी इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है। कई अखबार और चैनल वाले स्पेस बेचने लगे हैं। एक आ॓र जहां इनकी बिक्री बढ़ती है वहीं चैनलों की टीआरपी बढ़ती है और इन पार्टियों का क्रेज भी।

Published in:  on December 8, 2007 at 12:51 pm Leave a Comment